बारिश कितनी हुई, सब्जी का वजन कितना निकला और खेत की पैदावार क्या रही—साकड़ के आधारशिला लर्निंग सेंटर में इन सवालों से भी पढ़ाई होती थी। बड़वानी के इस केंद्र के पुराने विवरण बताते हैं कि गणित और भाषा को बच्चों के अपने अनुभवों से कैसे जोड़ा गया।

केंद्र 1998 में शुरू हुआ था। संस्थापक अमित और जयश्री ने मई–जून 2025 के शैक्षणिक संदर्भ में लिखा कि शुरुआती कक्षाओं की सामग्री स्थानीय बारेली में बनाई गई थी। उसके साथ आगे हिंदी और अंग्रेजी जुड़ती थीं। यानी नई भाषा सीखते समय घर की भाषा भी पढ़ाई में काम आती थी।

मार्च 2018 की अपनी यात्रा के विवरण में AIF फेलो लीना खान ने पहली-दूसरी कक्षा में बारेली को मुख्य शिक्षण भाषा बताया। तीसरी-चौथी में हिंदी की ओर बढ़ते हुए भी उसका उपयोग होता था। बारेली लिखने के लिए देवनागरी इस्तेमाल की जाती थी। इसलिए तरीका केवल बारेली में बोलने और हिंदी में लिखने का नहीं था।

2016–17 की वार्षिक रिपोर्ट में दो समूहों के वर्षामापी बनाकर रोज बारिश दर्ज करने का उल्लेख है। बच्चों ने तापमान और पक्षियों का अवलोकन भी रखा। खेती में सब्जी तौलना और प्रति गुंठा पैदावार निकालना शामिल था।

संस्थापकों के 2025 के लेख में शुरुआती लिखाई का एक और तरीका मिलता है: बच्चों के अपने नाम से शुरुआत। परिचित नाम लिखने के बाद अक्षरों और उनकी ध्वनियों की पहचान की ओर बढ़ना था। अपने आसपास की चीजें इस पाठशाला में पाठ बनाने का आधार थीं।

मुख्य बातें

  • साकड़ में आधारशिला की शुरुआत 1998 में हुई।
  • संस्थापकों के 2025 के लेख में स्थानीय भाषा का नाम बारेली लिखा है।
  • 2016–17 की रिपोर्ट में बच्चों के वर्षामापी और खेती का हिसाब दर्ज है।

स्रोत और संदर्भ

  1. आधारशिला लर्निंग सेंटर · How Adharshila Works ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. आधारशिला लर्निंग सेंटर · Annual Report 2016–17 ↗10 जून 2017
  3. American India Foundation · Starting with what you know ↗8 जून 2018
  4. एकलव्य / अमित और जयश्री · शैक्षणिक संदर्भ, मई–जून 2025: आधारशिला में पढ़ना-लिखना सीखने पर अमित और जयश्री का लेख ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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